IPC Act 506 in hindi | आईपीसी की धारा 506 क्या है |

किसी को धमकाना कैसे है अपराध देखिये धारा 506 के बारे में पूरी जानकारी क्या है धारा 506 और क्या है सज़ा का प्रावधान।

 

धारा 506 क्या है-सामान्यतः मनुष्य स्वभाब से शान्तिप्रिय होता है।  समाज में उसकी मान मर्यादा प्रतिष्ठा होती है वह ऐसा कोई कार्य नहीं करना चाहता जिससे उसके सम्मान को ठेस पहुचे उसका अपमान हो या उसके परिवार का अपमान हो। अगर फिर भी आदमी किसी दूसरे इंसान को धमकाता  है तो वह act 506  के तहत दंड का भागी होगा जिसके बारे में हमने आगे बताया है। हम आपको बताएगे धारा 506 क्या होती है और इसके अंतर्गत दंड क्या दिया जाता है।

 

आजकल के समय में लोग छोटी छोटी बातों पर लोगो को धमकी दे देते है।  तो धारा 506 उनही लोगो पर कार्यवाही करने के विषय में है जिसमे यह बताया गया है की कैसे लोगो को सिर्फ धमकी देने पर ही सज़ा हो सकती है।

आपराधिक अभित्रास से आशय :

जो कोई किसी व्यक्ति के शरीर, ख्याति या संपत्ति को या ऐसे व्यक्ति के शरीर, ख्याति संपत्ति को जिसका वह व्यक्ति हितैषी हो को कोई क्षति करने की धमकी देता है तो वह आईपीसी की act 506 के अंतर्गत सज़ा का पात्र होता है।


नोट ; अगर कोई व्यक्ति किसी मरे हुए व्यक्ति की ख्याति को क्षति पहुचाता है जिससे वह व्यक्ति जिसे धमकी दी गई है, हितबद्ध हो, इस धारा के अंतर्गत आता है।

Example : राम श्याम के मरने के बाद उसके घर को जलाने की धमकी देता है तो राम आईपीसी की धारा 506 के तहत सज़ा का भागी होगा।

आपराधिक अभित्रास के मुख्य तत्व:

आपराधिक अभित्रास में अपराधी द्वारा संपत्ति हानि या ख्याति हानि से संवन्धित धमकी देने से संवन्धित बात होती है इसमे संपत्ति को पाने के लिए धमकी देने की बात नहीं होती अगर संपत्ति पाने से संवन्धित धमकी देने की बात होती है तो उसे उद्धापन कहते है।

 

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आपराधिक अभित्रास और उद्धापन में अंतर :

  1. आपराधिक अभित्रास में संपत्ति या ख्याति के हानि की धमकी दी जाती है पर उद्धापन में संपत्ति पाने के लिए धमकी दी जाती है।
  2. आपराधिक अभित्रास में धमकी देने के लिए दोनों पक्षो का उपस्थित होना अनिवार्य नहीं है पर उद्धापन में दोनों पक्षो का उपस्थित होना अनिवार्य है।
  3. आपराधिक अभित्रास में पीड़ित व्यक्ति और अपराधी का संपत्ति परिदान करना आवश्यक नहीं है पर उद्धापन में दोनों पक्षो का संपत्ति परिदान करना आवश्यक है।
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धारा 506 के अंतर्गत दंड :

जो कोई व्यक्ति किसी की ख्याति, संपति या शरीर को हानि करने की धमकी देता है उसे इस धारा के अंतर्गत 2 वर्ष या जुर्माने या दोनों की सज़ा का प्रावधान है।

यदि धमकी किसी को मारने या बड़ी क्षति देने से संबन्धित हो तो सज़ा की अवधि 7 वर्ष या जुर्माने या दोनों के लिए दंडित किया जाएगा।

 

Example : सोहन मोहन से कहता है की यदि तुमने मेरा अमुक कार्य नहीं किया तो मैं तुमको जान से मार दूंगा तो सोहन धारा 506 के तहत अपराध का दोषी होगा।

जमानती या गैर जमानती:

यह अपराध गैर जमानती नहीं है अर्थात इसमे जमानत हो जाती है। 

 

किन कारणो में जमानत मिलना मुश्किल :

  • यदि धमकी किसी के जीवन को समाप्त करने से संवन्धित हो।
  • यदि धमकी लोक शांति भंग करने संवन्धित हो तो।
  • यदि धमकी किसी औरत के अस्तित्व पर लांछन लगाने संवन्धित हो तो।
  • यदि धमकी किसी धार्मिक प्रसंग को आहत करने संवन्धित हो तो।
  • यदि धमकी किसी वरिष्ठ इंसान पर हमले से संवन्धित हो तो।

धारा 506 के अंतर्गत किए गए अपराध में समझौता मुमकिन है या नहीं :

हा धारा 506 के अंतर्गत किए गए अपराध में समझौता मुमकिन है।

 

निष्कर्ष :

उम्मीद है की आपको मेरे द्वारा दी गयी जानकारी पसंद आई होगी आज मैंने आपको आईपीसी की act 506 क्या होती है इसके बारे में बताया अगर आपको इस धारा 506 से संबन्धित कुछ पूछना हो तो आप comment करके पूछ सकते है।

धारा 506 में अपराध क्या है?

किसी व्यक्ति को धमकाना इस धारा के अंतर्गत अपराध है।

धारा 506 में जमानत कैसे मिलती है?

धारा 506 में किए गए अपराध में समांतया जमानत आसानी से मिल जाती है पर अगर धमकी किसी व्यक्ति के जीवन के संकट से संवन्धित हो तो जमानत मिलना थोड़ा मुश्किल है।

धारा 506 में सज़ा कितनी है?

इस धारा में किए गए अपराध के लिए 2 वर्ष तक की सज़ा और जुर्माने का प्रावधान है।

B.COM, M.COM, B.ED, LLB (Gold Medalist Session 2019-20) वर्तमान में वह उत्तर प्रदेश के हाथरस जिले में एक विधिक सलाहकार के तौर पर कार्य कर रहे हैं।

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