धारा 312 क्या है? जानिए गर्भपात कराने पर क्या होगी सज़ा ? पूरी जानकारी हिन्दी में |

धारा 312 क्या है- समाज में व्याप्त कई बुराइयों में से गर्भपात एक गंभीर समस्या है।  आज भी कई बार गर्भपात जैसे कार्य आमतौर पर देखने को मिल जाते है।  गर्भपात के पीछे कई रूढ़ियाँ और कुंठित मानसिक स्थिति है जिसको दूर करने के लिए गर्भपात को अपराध की श्रेणी में रखा गया है।  जिसके बारे में हम आगे विस्तृत रूप से जानते है-

धारा 312 में अपराध क्या है?

dhara 312 के अंतर्गत किसी भी व्यक्ति के द्वारा किसी स्त्री के गर्भ को जानभुझ कर स्वेच्छा से गिराया जाता है या उस स्त्री का गर्भपात कराया जाता है तो ऐसा अपराध कारावास और जुर्माने से दंडनीय होगा।

धारा 312 में अपराध के आवश्यक तत्व क्या है-

  • गर्भपात कारित करना।
  • गर्भ से भ्रूण को अलग कर देना।
  • गर्भपात स्वेच्छा से किया जाना।

गर्भपात से आशय-

dhara 312 के अंतर्गत गर्भपात से आशय किसी भी महिला के गर्भाशय से उसके गर्भ में उत्पन्न भ्रूण को अलग करना या उसके गर्भ से बाहर निकालना है।

सद्भावना पूर्वक गर्भपात-

यदि किसी स्त्री का गर्भपात सद्भावना पूर्वक अर्थात ऐसी स्थिति हो कि गर्भपात करना स्त्री कि जान बचाने के लिए आवश्यक हो अर्थात यदि गर्भपात न किया जाए तो स्त्री की जान जा सकती है।  तो इस प्रकार का विषम परिस्थितियों में गर्भपात करना इस धारा के अंतर्गत अपराध नही माना जाएगा।

IPC SECTION 324 IN HINDI

स्त्री की सहमति है तो अपराध –

इस धारा के अंतर्गत चाहे गर्भपात स्त्री की सहमति से ही क्यों न कराया जा रहा हो दंडनीय होगा।  इस धारा के अंतर्गत यह महत्व नहीं रखता कि गर्भपात स्त्री की सहमति से कराया जा रहा है या असहमति से वरन सिर्फ गर्भपात स्वंम में अपराध माना जाएगा।

IPC SECTION 384 IN HINDI

धारा 312 में दंड क्या है?

dhara 312 में अपराधी को 3 वर्ष तक का दंड या जुर्माना या दोनों के लिए दंडित किया जा सकता है।

धाराअपराधदंडप्रक्रतिजमानतविचारण
312 गर्भपात कारित करना।3 वर्ष तक का कारावास या जुर्माना या दोनों।असंज्ञेयजमानतीय     प्रथम वर्ग मजिस्ट्रेट

समान्यतया पूछे गए प्रश्न

IPC धारा 312 क्या है?

धारा 312 किसी महिला के स्वेच्छा से या उसकी मर्ज़ी के खिलाफ गर्भपात कराये जाने पर दंड के संवन्ध में है।

धारा 312 में दंड क्या है?

धारा 312 में अपराधी को 3 वर्ष तक का कारावास या जुर्माना या दोनों के लिए दंडित किया जा सकता है।

IPC की धारा 312 में जमानत कैसे मिलती है।

आईपीसी की धारा 312 के अंतर्गत समान्यतया प्रथम वर्ग मजिस्ट्रेट से जमानत मिल जाती है।

अंतिम शब्द-

आज मैंने आपको धारा 312 क्या है इसके संवन्ध में विस्तार से सरल भाषा में समझाने की कोशिश की है। उम्मीद करता हु की आपको मेरे द्वारा दी गयी जानकारी पसंद आयी होगी अगर आपके कोई सवाल है तो आप कमेंट के माध्यम से पूछ सकते है धन्यबाद।

B.COM, M.COM, B.ED, LLB (Gold Medalist Session 2019-20) वर्तमान में वह उत्तर प्रदेश के हाथरस जिले में एक विधिक सलाहकार के तौर पर कार्य कर रहे हैं।

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