धारा 143 क्या है? IPC SECTION 143 IN HINDI

धारा 143 क्या है? 143 IPC IN HINDI

धारा 143 क्या है-सुख समृद्धि एवं स्वतंत्र जीवन यापन के लिए शांति आवश्यक है शांति के अभाव में ना तो राज्य ना ही व्यक्ति अपना विकास कर सकता है समाज में शांति बनाए रखना राज्य का कर्तव्य है लेकिन कई बार देखा गया है कि कुछ व्यक्ति ऐसे ही कार्य करते हैं जिनसे लोग शांति भंग होने की संभावना हो जाती है अर्थात समाज में अशांति पैदा करने वाले कार्य किए जाते हैं।

ऐसे कार्यों से लोगों की सुख शांति पर प्रभाव पड़ता है फिर एक कल्याणकारी एवं लोकतांत्रिक राज्य के लिए यह अपेक्षित है कि वह अपने प्रत्येक नागरिकों के हितों की रक्षा करें ताकि उनका जीवन सुख समृद्धि से खुशहाल बना रहे जब कई व्यक्तियों द्वारा एकत्रित होकर किसी विधि विरुद्ध कार्य के लिए जमाव किया जाता है और ऐसे जमाव का आशय समाज में व्याप्त शांति को नुकसान पहुंचाना होता है तो ऐसे कार्यों को भारतीय दंड संहिता की धारा 143 के अंतर्गत दंडनीय अपराध माना गया है आइए जानते हैं आईपीसी सेक्शन 143 के बारे में…

धारा 143 क्या है?

Indian penal code की धारा 143 के अनुसार, जो कोई विधि विरुद्ध जमाव का सदस्य होगा वह दोनों में से किसी भांति के कारावास से जिसकी अवधि 6 माह तक की हो सकेगी या जुर्माने से या दोनों से दंडित किया जाएगा।

धारा 143 के लिए आवश्यक तत्व-

  • 5 या 5 से अधिक लोगों का होना।
  • इन सभी व्यक्तियों का उद्देश्य विधि विरुद्ध होना।
  • इन सभी का आशय किसी ऐसे कार्य के प्रति होना जिससे समाज में व्याप्त शांति भंग होना समाज को सरकार को आतंकित करना अन्य ऐसे ही अपराधों से संबंधित होना है।
  • जमाव में एकत्र सभी लोगों का आशय एक होना।
  • जमाव में आमतौर पर हम लोगों ने देखा है कि कई व्यक्ति एकत्रित होकर किन्हीं ऐसे कार्यों को करते हैं जो एक जिम्मेदार नागरिक से अपेक्षा नहीं की जाती है वह स्वयं को तो कष्ट पहुंचाते ही है वरन अन्य व्यक्तियों को भी कष्ट पहुंचाते हैं और ऐसे कार्यों को करते हैं जो सामाजिक रूप से स्वीकार करने योग्य नहीं है ऐसे ही कई कार्यों को विधि विरुद्ध जमाव के अंतर्गत शामिल किया गया है।

विधि विरुद्ध जमाव के लिए दंड-

विधि विरुद्ध जमाव का जो भी सदस्य होगा वह व्यक्ति पांच या 5 से अधिक हो सकते हैं उनमें से प्रत्येक व्यक्ति यदि वह उस जवाब में सामान्य उद्देश्य रखता है अर्थात वह सभी किसी एक ही उद्देश्य के लिए जवाब में एकत्रित हुए थे तो प्रत्येक व्यक्ति इस धारा के अंतर्गत अपराधी होगा और ऐसे व्यक्ति को 6 माह तक की सजा दी जा सकती है न्यायालय द्वारा छह माह की सजा के अलावा जुर्माना भी दिया जा सकता है।

धाराअपराधदंडप्रक्रतिजमानतविचारण
143  विधि विरुद्ध जमाव का सदस्य होना।6 माह की सज़ा या जुर्माना या दोनों।संज्ञेयजमानतीय     कोई मजिस्ट्रेट

धारा 143 क्या है?

जो कोई विधि विरुद्ध जमाव का सदस्य होगा उसके लिए दंड का प्रावधान धारा 143 में बताया गया है।

धारा 143 के अंतर्गत दंड क्या है?

6 माह की सज़ा या जुर्माना या दोनों।

धारा 143 में जमानत कैसे मिलती है?

धारा 143 के अंतर्गत किसी भी मजिस्ट्रेट के द्वारा जमानत मिल जाती है।

अंतिम शब्द-

आज मेंने आपको आईपीसी की धारा 143 क्या है और इसके अंतर्गत दंड और जमानत का क्या प्रावधान है इसके बारे में विस्तार से सरल भाषा में बताने का प्रयत्न किया है मुझे उम्मीद है की आपको मेरे द्वारा दी गयी जानकारी पसंद आयी होगी अगर आपका कोई सवाल है तो आप कमेंट के माध्यम से पूछ सकते है धन्यबाद।

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B.COM, M.COM, B.ED, LLB (Gold Medalist Session 2019-20) वर्तमान में वह उत्तर प्रदेश के हाथरस जिले में एक विधिक सलाहकार के तौर पर कार्य कर रहे हैं।

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